tum meri zindagi ho ye sach hai | तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है

  - Bashir Badr

तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या

  - Bashir Badr

Faith Shayari

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    वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
    ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
    Aasi Ghazipuri
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    भरोसा तोड़कर अच्छा किया तुमने
    मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
    Aatish Alok
    जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
    ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
    Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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    यक़ीन कर वो तिरे पास लौट आएगा
    जब उस का उठने लगेगा यक़ीन लोगों से
    Varun Anand
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    तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
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    Dushyant Kumar
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    शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
    लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
    Jaun Elia
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    थी इक वक़्त अब शाइरी बस बची है
    यकीं करना मुझमे मुहब्बत नही है
    Parul Singh "Noor"
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    ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का
    होगा उन पर असर कभी न कभी
    Anwar Taban
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    उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़
    हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा
    Ameer Qazalbash
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    ऐसे रिश्ते का कोई अस्तित्व नहीं
    हरदम जिसमें यक़ीं दिलाना पड़ता है
    SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"

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    हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
    जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
    Bashir Badr
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    चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली
    सहमे सहमे हाथों ने इक किताब फिर खोली

    दाएरे अँधेरों के रौशनी के पोरों ने
    कोट के बटन खोले टाई की गिरह खोली

    शीशे की सिलाई में काले भूत का चढ़ना
    बाम काठ का घोड़ा नीम काँच की गोली

    बर्फ़ में दबा मक्खन मौत रेल और रिक्शा
    ज़िंदगी ख़ुशी रिक्शा रेल मोटरें डोली

    इक किताब चाँद और पेड़ सब के काले कॉलर पर
    ज़ेहन टेप की गर्दिश मुँह में तोतों की बोली

    वो नहीं मिली हम को हुक बटन सरकती जीन
    ज़िप के दाँत खुलते ही आँख से गिरी चोली
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    Bashir Badr
    सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में
    बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में

    पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा
    हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में

    रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा
    जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में

    यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम
    जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में

    मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे
    रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में

    जैसे आधी शब के बा'द चाँद नींद में चौंके
    वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में
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    Bashir Badr
    साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं
    इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

    उसकी भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ
    रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
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    Bashir Badr
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    पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
    ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है

    इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है
    पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है

    दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है
    ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है

    हम-रंग-ए-दिल-ए-पुर-ख़ूँ हर लाला-ए-सहराई
    गेसू की तरह मुज़्तर अब रात की रानी है

    जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है
    जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है

    ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है
    ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है

    ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल
    आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है

    इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
    हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है

    दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है
    शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है

    वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में
    नादीदा हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता कहानी है

    वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी है
    जिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है

    हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैं
    ऐ 'बद्र' मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है
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    Bashir Badr

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