vo jo khwaab the mere zehan mein na main kah saka na main likh saka | वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका

  - Iqbal Ashhar

वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका
कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ

  - Iqbal Ashhar

Yaad Shayari

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