khushiyon ki jis ke haath men ho aabroo habeeb | ख़ुशियों की जिस के हाथ में हो आबरू हबीब

  - Sohil Barelvi

ख़ुशियों की जिस के हाथ में हो आबरू हबीब
इक ऐसे रंग की है मुझे जुस्तुजू हबीब

मुद्दत के बाद लौट के बीनाई आई है
बहने लगा है आँख से मेरे लहू हबीब

जो भी मेरे क़रीब है वो मुझ से दूर है
किस शख़्स की करूँँ मैं बता आरज़ू हबीब

ये कौन मुझ को बारहा आवाज़ दे रहा
अब कौन करना चाहता है गुफ़्तुगू हबीब

हर शय दिखाई दे रही है ग़म-ज़दा मुझे
फैला है दर्द आज मेरे चार-सू हबीब

मिलने को तेरे बाद मिले ख़ूब-तर मगर
ज़िद थी मेरी कि तुझ सा मिले हू-ब-हू हबीब

मुद्दत हमारा चाक-ए-जिगर देखता रहा
आ जाए कोई आए करे अब रफ़ू हबीब

रंगत हमारे जिस्म की उड़ती चली गई
पी कर हमारा ख़ून हुए सुर्ख़-रू हबीब

  - Sohil Barelvi

Aankhein Shayari

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