koii samjhega nahin duniya men pyaara mujh ko | कोई समझेगा नहीं दुनिया में प्यारा मुझ को

  - Sohil Barelvi

कोई समझेगा नहीं दुनिया में प्यारा मुझ को
याद रह जाएगा बस नाम तुम्हारा मुझ को

दोस्त ने यार ने दुनिया ने मुझे लूट लिया
मैं समझता था नहीं होगा ख़सारा मुझ को

एक दो रात नज़र भर के नहीं देखा फ़लक
दम-ब-दम देख रहा एक सितारा मुझ को

अब तमन्ना तो यही है कि मैं जी लूँ थोड़ा
वक़्त गर लाया है इस सम्त दोबारा मुझ को

तब कहीं जा के सफ़ीने में मुसाफ़िर बैठे
पहले दरिया में मिरे यार उतारा मुझ को

जो सज़ा आज तुझे देनी है दे ले लेकिन
कोई इल्ज़ाम नहीं देना दोबारा मुझ को

जब मैं नासाज़ तबीअत में था तो ग़ौर किया
मौत ने आ के कई बार पुकारा मुझ को

क्या करूँँ वक़्त ने बे-रंग बना डाला है
रास आता ही नहीं कोई नज़ारा मुझ को

  - Sohil Barelvi

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