किसी की बद्दुआ का अब असर होने लगा है
जो आसाँ था वो अब मुश्किल सफ़र होने लगा है
कोई अपना पराया हो नहीं सोचा था मैंने
नहीं सोचा था ऐसा हो मगर होने लगा है
तू कैसे साथ है मेरे तिरे होते हुए भी
तिरी यादों पे अब मेरा गुज़र होने लगा है
हमारी आस्तीं में कुछ सपोले पल रहे हैं
अभी से ज़हर का हम पर असर होने लगा है
रहा करते थे कल तक ख़ुशनुमा चेहरे जिगर में
मगर ये आज कल ख़ाली नगर होने लगा है
तुम्हारे काम के कल तक नहीं थे अजनबी थे
तुम्हारा ध्यान अब जा कर इधर होने लगा है
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