आइने सच कहे जाने से जो कतराएँगे
भूल होगी बड़ी इक रोज़ वो पछताएँगे
राब्ता टूट गया और वो सलामत भी हैं
हाँ वही शख़्स जो कहते थे कि मर जाएँगे
शहर की ओर कमाने गए लड़कों ने कहा
अबकी त्यौहार जो आएगा तो घर जाएँगे
ज़िंदगी इश्क़ है बच्चों को सिखाएँ वरना
ज़िंदगी जंग है जानेंगे तो डर जाएँगे
— Sandeep kushwaha















