Afzal Sultanpuri

Afzal Sultanpuri

@afzalsultanpuri007

Afzal Sultanpuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Afzal Sultanpuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

ख़ुद के जो काम आ नहीं सकते मेरे क्या ख़ाक काम आएँगे — Afzal Sultanpuri
मैं अकेला नहीं हूँ कमरे में साथ रहती है मेरे तन्हाई — Afzal Sultanpuri
ज़रा मेरा अक़ीदा मुख्तलिफ़ है तभी तुम दूर हम सेे जा रहे हो — Afzal Sultanpuri
अपनी आँखों का नूर खो बैठे जो मिली थी वो हूर खो बैठे — Afzal Sultanpuri
ख़्वाब मरते नहीं बिखर जाते तुम न मिलते तो यार मर जाते — Afzal Sultanpuri
पहले पहल तो पहला था उस शख़्स के लिए फिर यूँँ हुआ कि उस ने मुझे दूसरा किया — Afzal Sultanpuri
रुख़्सत तुझ को होते देखे ख़ुद को कैसे रोते देखे — Afzal Sultanpuri
उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है — Afzal Sultanpuri
अपनी मय्यत उठा नहीं सकता चार कंधों की अब ज़रूरत है — Afzal Sultanpuri
जहाँ पर छोड़कर सब जा चुके थे वहाँ तेरा सहारा चाहिए था — Afzal Sultanpuri
मोहब्बत में लिया था लोन मैं ने वही किश्तें मुसलसल भर रहा हूँ — Afzal Sultanpuri
अफ़ज़ल ये मसअला है सितम्बर के बा'द का फिर उस के बा'द शख़्स वो मेरा नहीं रहा — Afzal Sultanpuri
मतलबी लोग मतलबी दुनिया अपने ही बोझ में दबी दुनिया — Afzal Sultanpuri
प्यार मेरा ख़रीद लेगा वो यार उस का अमीर है मुर्शिद — Afzal Sultanpuri
उन्हीं ख़्वाबों में जी लेना उन्हीं ख़्वाबों से डर जाना हमारे पास मत आना भले तुम यार मर जाना — Afzal Sultanpuri
फेंक आया जो लाश गंगा में क़त्ल था ख़ुद-कुशी नहीं थी वो — Afzal Sultanpuri

Ghazal

सब कुछ हमें ख़बर है नसीहत न दीजिए हम हैं फ़कीर हम को हुकूमत न दीजिए ज़िंदा रहे तो आपने पूछा कभी न हाल अब क़ब्र में पड़े हैं ज़ियारत न दीजिए धड़कन थमी हुई है तबीयत ख़राब है लाएँ दवा कहाँ से अज़ीयत न दीजिए सबके नसीब में नहीं होती मोहब्बतें मरते हुए को आप मोहब्बत न दीजिए हम सब्र कर रहे थे मगर तुम नहीं मिले अल्लाह तन्हा जीने की आदत न दीजिए जो लोग कह रहे हैं ख़सारा है इश्क़ में उन को वफ़ा के शहर में इज़्ज़त न दीजिए भटके हुए को कौन भला रोक पाएगा ऐसे मुसाफ़िरों को हिदायत न दीजिए 'अफ़ज़ल' गुनाह करते हुए डर नहीं लगा मालिक इसे कभी भी इमामत न दीजिए — Afzal Sultanpuri
हज़रत-ए-क़ैस ख़िताबत के लिए आऍंगे हम तिरे शहर मोहब्बत के लिए आऍंगे हम तो रोएँगे इसी सोच में पागल होकर हाल पूछेंगे तबीयत के लिए आऍंगे रक़्स करते थे तुम्हें पा के मगर क्या हासिल क्या ख़बर आप नसीहत के लिए आऍंगे लौट आए भी अगर आप हमारी जानिब हाँ फ़क़त अपनी ज़रूरत के लिए आऍंगे ज़ुल्म के आप तरफ़दार नज़र आते हैं आप आएँगे हुकूमत के लिए आऍंगे जिस तरह चाल चली आपने हम पर ज़ालिम साफ़ लगता है शिकायत के लिए आऍंगे तेरी चौखट पे कभी आ भी गए याद रहे बस दुआ और इबादत के लिए आऍंगे बा'द मरने के भी ग़ुस्सा है वो मुझ सेे 'अफ़ज़ल' हम ने बोला था ज़ियारत के लिए आऍंगे — Afzal Sultanpuri

Nazm