तुम सा उम्दा मिसाल है भी नहीं
चीखूँ तुम पर मजाल है भी नहीं
ख़ुद को बर्बाद कर लिया हम ने
और इस का मलाल है भी नहीं
आप पर ज़ुल्म कर नहीं सकता
दिल में गंदा ख़याल है भी नहीं
इस पे तो ऐतराज़ बनता है
ख़ैर कोई सवाल है भी नहीं
मौत को याद करना 'अफ़ज़ल' है
ख़ुद-कुशी कुछ कमाल है भी नहीं
— Afzal Sultanpuri















