ro pade todakar kasam dono | रो पड़े तोड़कर क़सम दोनों

  - Afzal Sultanpuri

रो पड़े तोड़कर क़सम दोनों
फिर मिलेंगे किसी जनम दोनों

एक तस्वीर थी हमारी भी
'इश्क़ करते हुए सनम दोनों

वो महीना जुलाई दस तारीख़
पास बैठे हुए थे हम दोनों

सारी दुनिया सलाम करती फिर
साथ लेकर चलें अलम दोनों

एक दिन दिख गई कमी मुझ
में
फिर लगे मिलने और कम दोनों

मैं कहाँ रह गया कहानी में
इस सफ़र को करें खतम दोनों

सब पता है सही गलत अफ़ज़ल
क्यूँ करें 'इश्क़ पे सितम दोनों

  - Afzal Sultanpuri

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