अफ़ज़ल गुनाह करते हुए डर नहीं गएबेशर्म हो गए हो मगर मर नहीं गएकल शाम ये ख़बर मिली हम फ़ौत हो गएमय्यत उठाने अपनी भी हम घर नहीं गए— Afzal Sultanpuri