इश्क़ की सरहदों को पार करो
कर सको गर तभी तो यार करो
करना आए अगर सलीक़े से
बे-तहाशा सनम को प्यार करो
इश्क़ के नाम का हो तीर अगर
तीर सीने के आर-पार करो
उस की मर्ज़ी करे क़ुबूल नहीं
अपनी जानिब से बे-शुमार करो
जो मोहब्बत का सुन के दौड़ पड़े
ऐसे लड़कों को होशियार करो
बीच रस्ते अकेला छोड़े जो
बीच रस्ते में शर्मसार करो
जिस्म को रौंदने का आदी हो
ऐसे आशिक़ को आश्कार करो
वो फ़रेबी हुआ ग़लत क्या है
हाँ मगर तुम तो ए'तिबार करो
तुम को अल्लाह ख़ुश रखे हरदम
ये दुआ रोज़ बार-बार करो
लौट आएगा एक दिन 'अफ़ज़ल'
सब्र से साथ इंतिज़ार करो
— Afzal Sultanpuri















