पहले से बा'द हो गया हूँ मैं
मर के आज़ाद हो गया हूँ मैं
इश्क़ था यार मैं कभी जिस का
उस की अब याद हो गया हूँ मैं
ख़ैर तुम बात को नहीं समझे
क़ैस फ़रहाद हो गया हूँ मैं
बद-दुआ काम आ गई उस की
देख बर्बाद हो गया हूँ मैं
सैकड़ों लोग मारते पत्थर
सबकी फ़रियाद हो गया हूँ मैं
— Afzal Sultanpuri















