हर बात है वही पर मतलब बदल गए हैं
पहले नहीं थे ऐसे वो अब बदल गए हैं
इक दिन वो बोल बैठी हो बेवक़ूफ़ कितने
उम्मीद क्यूँ लगाई जब सब बदल गए हैं
हो हम मुनाफ़िक़ों को कैसे नसीब मोमिन
दोनों उसी ख़ुदा के पर रब बदल गए हैं
— Afzal Sultanpuri
पहले नहीं थे ऐसे वो अब बदल गए हैं
इक दिन वो बोल बैठी हो बेवक़ूफ़ कितने
उम्मीद क्यूँ लगाई जब सब बदल गए हैं
हो हम मुनाफ़िक़ों को कैसे नसीब मोमिन
दोनों उसी ख़ुदा के पर रब बदल गए हैं
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling