हमें जो आज हिचकी आ रही थी
हमारी जान निकली जा रही थी
यक़ीं माने मोहब्बत आप ही हैं
हमें ये बात वो समझा रही थी
दिलों को तोड़कर क्या ही मिलेगा
ये कहकर ज़ुल्म हम पर ढा रही थी
दुआ के साथ रुख़्सत कर दिया फिर
रहे ख़ुश वो जहाँ भी जा रही थी
अगर मालूम होता तो समझती
बिछड़कर याद उनकी आ रही थी
करे तो क्या करे वो आम लड़की
किया हम पर यक़ीं पछता रही थी
वो दुनिया थी किसी की और 'अफ़ज़ल'
यही सच है मेरी दुनिया रही थी
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