ख़ुद को दिलदार कर भी दो जानमइश्क़ इज़हार कर भी दो जानमआप की याद आ रही हम कोहम से अब प्यार कर भी दो जानमआप को देख कर हुए पागलहम को बीमार कर भी दो जानमहो गए साल भर मिले हम कोसब हदें पार कर भी दो जानमअपनी तुम गोद में सुला लो फिरदर्द को तार कर भी दो जानम— Afzal Sultanpuri