पहले सोचा तो यही था कि गुज़ारा कर लूँफिर ये सोचा कि मोहब्बत ही दुबारा कर लूँउस को तकलीफ़ में देखा भी नहीं जा सकताले के कश्ती को ही अपनी मैं किनारा कर लूँ— Afzal Sultanpuri