Muztar Khairabadi

Muztar Khairabadi

@muztar-khairabadi

Muztar Khairabadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muztar Khairabadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा रंग गहरे हैं हमारी शाम के — Muztar Khairabadi
लड़ाई है तो अच्छा रात-भर यूँँ ही बसर कर लो हम अपना मुँह इधर कर लें तुम अपना मुँह उधर कर लो — Muztar Khairabadi
वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते कहा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते — Muztar Khairabadi
वो गले से लिपट के सोते हैं आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में — Muztar Khairabadi
बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के — Muztar Khairabadi

Ghazal

वो क़ज़ा के रंज में जान दें कि नमाज़ जिन की क़ज़ा हुई तिरे मस्त-ए-बादा-ए-शौक़ ने न कभी पढ़ी न अदा हुई तिरे दौर-दौरा-ए-इश्क़ में मिरी एक रंग से कट गई न सितम हुआ न करम हुआ न जफ़ा हुई न वफ़ा हुई मुझे ग़ैर-ए-इज्ज़-ओ-नियाज़ ने तिरे दर पे जा के झुका दिया न तो कोई अहद लिखा गया न तो कोई रस्म अदा हुई मिरा दिल भी था मिरी जाँ भी थी न वही रहा न यही रही मुझे क्या ख़बर कि वो क्या हुआ मुझे क्या ख़बर कि ये क्या हुई मिरी उम्र 'मुज़्तर'-ए-ख़स्ता-दिल कटी रंज-ओ-दर्द-ओ-फ़िराक़ में न किसी से मेरी दवा हुई न दवा से मुझ को शिफ़ा हुई — Muztar Khairabadi
न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ किसी काम में जो न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ न दवा-ए-दर्द-ए-जिगर हूँ मैं न किसी की मीठी नज़र हूँ मैं न इधर हूँ मैं न उधर हूँ मैं न शकेब हूँ न क़रार हूँ मिरा वक़्त मुझ से बिछड़ गया मिरा रंग-रूप बिगड़ गया जो ख़िज़ाँ से बाग़ उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ पए फ़ातिहा कोई आए क्यूँँ कोई चार फूल चढ़ाए क्यूँँ कोई आ के शम्अ' जलाए क्यूँँ मैं वो बेकसी का मज़ार हूँ न मैं लाग हूँ न लगाव हूँ न सुहाग हूँ न सुभाव हूँ जो बिगड़ गया वो बनाव हूँ जो नहीं रहा वो सिंगार हूँ मैं नहीं हूँ नग़्मा-ए-जाँ-फ़ज़ा मुझे सुन के कोई करेगा क्या मैं बड़े बिरोग की हूँ सदा मैं बड़े दुखी की पुकार हूँ न मैं 'मुज़्तर' उन का हबीब हूँ न मैं 'मुज़्तर' उन का रक़ीब हूँ जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ — Muztar Khairabadi