कर लिया उसने भी किनारा है
जिसके क़ब्ज़े में दिल हमारा है
वो मेरी आँख से उतरता नहीं
मुझ
में इक दर्द जो तुम्हारा है
कैसे कह दें कि वो पराया है
नाम से उसके ही गुज़ारा है
अब तो बस मौत आना बाक़ी है
कर दिया उसने भी इशारा है
डूबने वालों को बचाता नहीं
कितना मजबूर ये किनारा है
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