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मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
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वही लड़की जो गोरी थी वही काली निकलती है
अगर साज़िश के पीछे आप की वाली निकलती है
अगर साज़िश के पीछे आप की वाली निकलती है
कभी ससुराल जा कर के मना कर देखिए होली
कभी सरहज निकलती है कभी साली निकलती है
मुहल्ले की सभी भउजाइयों का रंग देवर पर
उतरता है तो बरबस होंट से गाली निकलती है
करें क्या हम कहो जानांँ कहीं टिकुली कहीं पायल
कहीं तकिए के नीचे कान की बाली निकलती है
जहाँ सब लोग पागल हैं करें सब क़ैद मुट्ठी में
सभी की अंत में मुट्ठी वहीं ख़ाली निकलती है
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जिसे मंज़िल बताया जा रहा था
वो रस्ते के सिवा कुछ भी नहीं है
वो रस्ते के सिवा कुछ भी नहीं है
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