wahin ladki jo gori thii wahin kaali nikalti hai | वही लड़की जो गोरी थी वही काली निकलती है

  - Atul K Rai

वही लड़की जो गोरी थी वही काली निकलती है
अगर साज़िश के पीछे आपकी वाली निकलती है

कभी ससुराल जाकर के मनाकर देखिए होली
कभी सरहज निकलती है कभी साली निकलती है

मुहल्ले की सभी भउजाइयों का रंग देवर पर
उतरता है तो बरबस होंट से गाली निकलती है

करें क्या हम कहो जानांँ कहीं टिकुली कहीं पायल
कहीं तकिए के नीचे कान की बाली निकलती है

जहाँँ सब लोग पागल हैं करें सब क़ैद मुट्ठी में
सभी की अंत में मुट्ठी वहीं ख़ाली निकलती है

  - Atul K Rai

Aurat Shayari

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