कर लिया उस ने भी किनारा है
जिस के क़ब्ज़े में दिल हमारा है
वो मेरी आँख से उतरता नहीं
मुझ
में इक दर्द जो तुम्हारा है
कैसे कह दें कि वो पराया है
नाम से उस के ही गुज़ारा है
अब तो बस मौत आना बाक़ी है
कर दिया उस ने भी इशारा है
डूबने वालों को बचाता नहीं
कितना मजबूर ये किनारा है
— Najib Murad















