एक मुद्दत से तू लापता है
ढूँढ़ने से भी तू कब मिला है
हर घड़ी याद में तू है शामिल
मेरी धड़कन से तू कब जुदा है
बस ये बातें सताती हैं मुझ को
क्यूँ तू पहला नहीं दूसरा है
ख़ुश मैं इस बात पे हो गया हूँ
तेरा मेरा तो एक रास्ता है
मेरी नादानी पर हॅंस रहे हो
तुम तो कहते थे तू आईना है
मेरी अब जा के क़ीमत बढ़ी है
जब से तू ने मुझे पढ़ लिया है
ज़हर कैसे उसे हम पिलाऍं
जिस के हाथों से पानी पिया है
अपनी ज़ुल्फ़ों का आदी बना के
पूछते हो मुझे क्या हुआ है
— Najib Murad















