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ख़्वाब में रात रू-ब-रू था वो
जैसा सोचा था हू-ब-हू था वो
जैसा सोचा था हू-ब-हू था वो
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इश्क़ को कार-ए-दिल्लगी समझा
या ख़ुदा हम ये क्या समझ बैठे
या ख़ुदा हम ये क्या समझ बैठे
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आज फिर याद आ गई उन की
फिर हुईं आज तर-बतर आँखें
फिर हुईं आज तर-बतर आँखें
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जी रहा हूँ मैं ऐसे आलम में
आप होते तो मर गए होते
आप होते तो मर गए होते
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