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Harsh Kumar Bhatnagar

Top 10 of Harsh Kumar Bhatnagar

Harsh Kumar Bhatnagar

Top 10 of Harsh Kumar Bhatnagar

    पाँच सालों की मोहब्बत को भुला देना है अब
    कब तलक मैं हिज्र में ही शा'इरी करता फिरूँ
    Harsh Kumar Bhatnagar
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    परिंदों को शजर का दुख बताया है
    ख़िज़ाँ में सारा जंगल रोने आया है

    ग़रीबी तोड़ कर रख देती है बंदा
    नमक को छोड़ कर आँसू मिलाया है

    ग़ज़ल का शौक़ कैसे पड़ गया हम को
    ये किस के ग़म ने हम को इतना खाया है
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    9
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    बू-ए-मोहब्बत को जहाँ में फ़ैल जाने दो ज़रा
    ये तितलियों को फिर गुल-ए-नर्गिस पे आने दो ज़रा

    कब से शब-ए-उम्मीद हूँ दीदार की ख़ातिर तिरी
    इक बार तो बंदे को हाल-ए-दिल सुनाने दो ज़रा

    अब देखना है ये समुंदर किस तरफ़ ले जाता है
    लहरों की बाहों में मिरी कश्ती को आने दो ज़रा

    जो मुफ़्लिसी की आड़ में बचपन को भूले बैठे हैं
    तालाब में फिरसे उन्हें गोते लगाने दो ज़रा

    किस ने कहा फिरसे मोहब्बत की नहीं जा सकती है
    ये ग़म-ज़दा लोगों को फिरसे दिल लगाने दो ज़रा
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    8
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    ख़फ़ा होने पर तुम मना लेना मुझ को
    अगर दिल करे आज़मा लेना मुझ को

    उठा देना महफ़िल से जब दिल करे तू
    मगर वक़्त पे फिर बुला लेना मुझ को
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    7
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    हम गली से उस की कुछ आँसू बहा के निकले हैं
    इश्क़ कितना है हमें सब सच बता के निकले हैं

    उस की मर्ज़ी है वो चाहे या न चाहे हम को पर
    उस की ख़ातिर हम तो अपना सब लुटा के निकले हैं
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    6
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    गर गले मिलना है तो ख़ुशी में मिलो
    उस की चाहत है तो फ़रवरी में मिलो

    फूल तो तुझ को हम दे ही देंगे मगर
    पहले आ कर के पिछली गली में मिलो

    एक बोसे की ख़ातिर ही बैठा हूँ मैं
    तुम मुझे चाँद की चाँदनी में मिलो
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    5
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    फड़फड़ाने लगा है परिंदा भी अब
    पिंजरा भी खोल उस को उड़ाना पड़ा
    Harsh Kumar Bhatnagar
    4
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    पास मेरे वो आ नहीं सकता
    दूर उस से मैं जा नहीं सकता

    जब से मैं हारा हूँ मुहब्बत में
    दिल कहीं भी लगा नहीं सकता

    तेरे बिन मैं अधूरा सा लगता
    हाथ तुझ से छुड़ा नहीं सकता

    एक लड़की का हूँ मैं दीवाना
    ख़ुद को पागल बता नहीं सकता

    तेरी ख़ातिर मैं लाया हूँ कंगन
    चाँद तारे मैं ला नहीं सकता

    मैं ने रख दीं निकाल कर आँखें
    अब वो मुझ को रुला नहीं सकता

    शे'र लिखता हूँ ज़िंदगी पर मैं
    बिन सुनाए मैं जा नहीं सकता
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    3
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    वो मुझे छोड़ कर भी नहीं जा रहा
    पर मिरे पास भी वो कहाँ आ रहा

    वो परिंदा भी अब उड़ गया है कहीं
    वो मेरी छत पे वापस नहीं आ रहा
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    Harsh Kumar Bhatnagar
    2
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    क़त्ल होना भी ज़रूरी था हमारा
    उन का कारोबार है चाकू छुरी का
    Harsh Kumar Bhatnagar
    1
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