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जान पहचान किसी से भी बनाएँ हम क्यूँ
चार लोगों का भला बोझ बढ़ाएंँ हम क्यूँ
चार लोगों का भला बोझ बढ़ाएंँ हम क्यूँ
बात लफ़्ज़ों में कभी तुम भी समझ लेना अब
बात सारी ही इशारों में बताएंँ हम क्यूँ
ये तमीज़ आप को थोड़ी बहुत आती होगी
आप को सामने से रोज़ बलाएँ हम क्यूँ
फ़र्क पड़ता नहीं फूलों को तिरे आने से
बाग़ में ऐसे गुलों को फिर उगाएंँ हम क्यूँ
क़ाबिल ए दार हमारे भी अलावा हैं बहुत
सिर्फ़ ख़ुद को ही गुनहगार गिनाएंँ हम क्यूँ
है ज़बान आप के मुँह में भी तो कुछ बोलो ना
हर दफ़ा आप की आवाज़ उठाएँ हम क्यूँ
और भी रंज हैं और दर्द ज़माने में भरे
बस मुहब्बत की ही ग़ज़लों को सुनाएँ हम क्यूँ
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शा'इरी इक अजीब फ़न तो है
हम में थोड़ा सा बाँकपन तो है
हम में थोड़ा सा बाँकपन तो है
क्या हुआ गर नहीं है साथ तेरा
मेरे घर में अकेलापन तो है
फ़र्क़ क्या है अगर नहीं संगीत
बेड़ियों की खनन खनन तो है
मुल्क अपना महान है अब भी
चाहे बंजर है पर चमन तो है
फिर मुहब्बत नहीं करेंगे हम
दिल नहीं मानता प मन तो है
ज़िंदगी में मज़ा नहीं लेकिन
सिर्फ़ थोड़ा बहुत सुखन तो है
गुल-बदन होने का सबूत है ये
उस के छूने में इक चुभन तो है
ज़ुल्म सहते हुए ही सोना है तो
नहीं कंबल तो क्या कफ़न तो है
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सुनाना चाहता हूँ चुटकुले हमशक्ल को अपने
मुझे इक बार ख़ुद को मुस्कुराते देखना है बस
मुझे इक बार ख़ुद को मुस्कुराते देखना है बस
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मुझे कभी भी मुहब्बत समझ नहीं आई
पर उस से ज़्यादा तो नफ़रत समझ नहीं आई
पर उस से ज़्यादा तो नफ़रत समझ नहीं आई
नशीन तख़्त पे हो, मुफ़्लिसों से तेवर हैं
मुझे तुम्हारी सियासत समझ नहीं आई
गुनाहगार नहीं, आम लोग क़ैद में है
भला ये कैसी हिफ़ाज़त, समझ नहीं आई
गुलों के साथ ये पानी पिलाए कांँटो को
ये बाग़बां की शराफ़त समझ नहीं आई
तुम्हें ये ख़्वाब हमारा समझ नहीं आया
हमें तुम्हारी हक़ीक़त समझ नहीं आई
रगों से मर्द की औरत हर एक वाकिफ़ है
किसी भी मर्द को औरत समझ नहीं आई
वो शख़्स जिस को मुहब्बत हुई न हो तुम से
उसे ख़ुदा की करामत समझ नहीं आई
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इतना नशा है उस की दोनो आँखों में
उस काजल की हेरा-फेरी होती है
चूमना उस को काम हो जैसे सरकारी
सरकारी कामों में देरी होती है
छोड़ के फूलों को अब हर इक तितली भी
बस उस के चहरे पे ठहरी होती है
और सभी के साथ फ़कत गप्पे मारे
तेरे साथ ही बातें गहरी होती है
चूमा उस का माथा मैं ने भी ऐसे
जैसे केक के ऊपर चेरी होती है
मानो सूरज को बादल ने घेरा हो
जब चेहरे पे ज़ुल्फ़ बिखेरी होती हैं
डिज़्नी की परियों जैसा है प्यार अपना
और लड़ाई टॉम एंड जेरी होती है
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