शा'इरी इक अजीब फ़न तो है

हम में थोड़ा सा बाँकपन तो है

क्या हुआ गर नहीं है साथ तेरा
मेरे घर में अकेलापन तो है

फ़र्क़ क्या है अगर नहीं संगीत
बेड़ियों की खनन खनन तो है

मुल्क अपना महान है अब भी
चाहे बंजर है पर चमन तो है

फिर मुहब्बत नहीं करेंगे हम
दिल नहीं मानता प मन तो है

ज़िंदगी में मज़ा नहीं लेकिन
सिर्फ़ थोड़ा बहुत सुखन तो है

गुल-बदन होने का सबूत है ये
उस के छूने में इक चुभन तो है

ज़ुल्म सहते हुए ही सोना है तो
नहीं कंबल तो क्या कफ़न तो है

— Maher painter 'Musavvir'

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Tanhai Shayari

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