Dhiraj Singh 'Tahammul'

Dhiraj Singh 'Tahammul'

@dhirajsinghtahammul

Dhiraj Singh 'Tahammul' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dhiraj Singh 'Tahammul''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

ज़िक्र होता है तिरा जब भी धड़कता दिल बहुत है भूलना तुझ को सितमगर आज भी मुश्किल बहुत है — Dhiraj Singh 'Tahammul'
सुख़न अब तक तिरी ज़ुल्फ़ों के पेचओख़म में उलझा है हमें जब इश्क़ होगा तो बयाँ अश'आर कर देंगे — Dhiraj Singh 'Tahammul'
है सहज स्वीकार जो जीवन पे वो अपवाद तुम ज़िंदगी अवसाद है अवसाद में उन्माद तुम — Dhiraj Singh 'Tahammul'
इशारों ही में हाल-ए-दिल मैं सारा खोल जाता हूँ बहुत ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोल जाता हूँ — Dhiraj Singh 'Tahammul'
बन कर कसक चुभती रही दिल में मिरे इक आह थी ऐ हम–नफ़स मेरे मुझे तुझ सेे वफ़ा की चाह थी — Dhiraj Singh 'Tahammul'
हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी — Dhiraj Singh 'Tahammul'
छोड़कर तीर-ए-नज़र जान-ए-जिगर देखो नहीं देखते हो जिस क़दर तुम उस क़दर देखो नहीं — Dhiraj Singh 'Tahammul'
साथ दिया है किस ने किस का किस की सोहबत कौन चलेगा मेरी ज़िल्लत मेरी ख़िफ़्फ़त ले कर तोहमत कौन चलेगा — Dhiraj Singh 'Tahammul'
घूमता है दिल में मेरे एक नम ख़याल किस तरह से खोजते हैं लोग हम ख़याल — Dhiraj Singh 'Tahammul'
ख़ून से जोड़ा हुआ हर ईंट ढेला हो गया दो तरफ़ चूल्हे जले औ' घर अकेला हो गया — Dhiraj Singh 'Tahammul'

Ghazal

फ़क़त हम ही नहीं रुसवा हुए हैं जान दिल्ली में कई शाहों के टूटे हैं यहाँ अरमान दिल्ली में लिए हाथों में फिरते हैं सभी दिल दर्द पाने को नहीं मिलता मगर इस दर्द का दरमान दिल्ली में मुसलसल ही रही सब रंजिशें अहल-ए-वतन की याँ वहाँ पर बस बदलते रह गए सुलतान दिल्ली में सियासत से पड़ेगी आशिक़ी महंँगी बहुत साहिब ज़बर क़हबा ये इस के हैं कई क़ुर्बान दिल्ली में उड़ाई है महक मय की लगा मज्मा पियासों का बिके है कौड़ियों के भाव में ईमान दिल्ली में ज़माने के हुए मर्दूद फिरते हैं सियाही में ‘तहम्मुल’ भी बने आए थे ‘तुर्रम ख़ान’ दिल्ली में — Dhiraj Singh 'Tahammul'