आह से कराह की है चाह पर हूँ चुपअब फ़क़त है दर्द से निबाह पर हूँ चुपकर दिया है क़त्ल मैं ने आप को कहींऔर हूँ मैं आप ही गवाह पर हूँ चुप— Dhiraj Singh 'Tahammul'