हमारी ज़ुबाँ में ज़ुबाँ आते आते
फ़ना हो गए लफ़्ज़ ए जाँ आते आते
लगायी गई आग घर में हमारे
हुई ख़ाक दुनिया धुआँ आते आते
किया इन्तिज़ार उसने छुट्टी का काफ़ी
गई ज़िन्दगी छुट्टियाँ आते आते
हमें मौत दे दो जवानी में यारों
कहाँ हम जियें झुर्रियाँ आते आते
सितम मेरी बीनाई ने ये किया है
वो गुम हो गई चीट्ठियाँ आते आते
उसे ग़म भगाने बिठाया था हमने
ख़ुशी भी गई हुक्मराँ आते आते
रखी मेज़ पर हमने दावत भी लेकिन
रहे भूखे सब कुर्सियाँ आते आते
मुसव्विर मुहब्बत से बचता फिरे है
ज़बाँ पे "नहीं" आया "हाँ" आते आते
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Maher painter 'Musavvir'
our suggestion based on Maher painter 'Musavvir'
As you were reading Mehboob Shayari Shayari