मैं वहशत को फ़ुग़ानी लिख रहा हूँ
    मुहब्बत तुझको फ़ानी लिख रहा हूँ,

    हुआ बर्बाद जिस किरदार से मैं
    उसी को ज़िंदगानी लिख रहा हूँ

    सभी किरदार मरते जा रहे हैं
    अनोखी इक कहानी लिख रहा हूँ

    जुनूँ वहशत ने मुझ पर क्या किया है
    ज्वाला को मैं पानी लिख रहा हूँ

    यकीं कर आसमाँ झुक जायेगा ये
    अपाहिज की ज़बानी लिख रहा हूँ

    मआनी ज़िंदगी के क्या लिखूँ मैं
    किराए पर मकानी लिख रहा हूँ

    न हो ख़रगोश जैसा हाल अपना
    सो कछुए की रवानी लिख रहा हूँ

    कहानी मेरी है किरदार मेरा
    मैं अपनी तर्जुमानी लिख रहा हूँ

    उसे एहसास ना हों ग़म हमारे
    मैं ग़म को शादमानी लिख रहा हूँ

    मुहब्बत में बिछड़ना मरहला है
    जुदाई जावेदानी लिख रहा हूँ

    तुझी से ज़िस्म उजड़ा जान उजड़ी
    तुझी को राजधानी लिख रहा हूँ

    मुझे तहज़ीब में लिखना पड़ेगा
    ग़ज़ल में ख़ानदानी लिख रहा हूँ

    Abhinav Baishander
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    हुआ बर्बाद जिस किरदार से मैं
    उसी को जिंदगानी लिख रहा हूँ

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    शजर की शाख़ पर झूले पड़े हैं
    बहन ने बाँध दी राखी हमारे

    Abhinav Baishander
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    जिसने अपनी जंग लड़ी हो शिद्दत से
    उसने अपना नाम अमर कर लेना है

    Abhinav Baishander
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    ग़म, ख़ुशी, चाह, उदासी को समझने वाला
    मुझसे बेहतर हो कोई मुझको समझने वाला

    Abhinav Baishander
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    मुझे याद रखना दुआओं में यारों
    बहुत दूर इक दिन चला जाऊँगा मैं

    Abhinav Baishander
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    ख़्वाबों की तस्वीर बनाने वालों ने
    ख़्वाहिश को ही अपने 'पर' कर लेना है

    Abhinav Baishander
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    तुम्हारे साथ तो कट जाएगी
    तुम्हारे बाद क्या होगा सनम

    Abhinav Baishander
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    अव्वल, अव्वल सबने आने की ज़िद है
    क्या सबने मेहनत फ़र-फ़र कर लेना है?

    Abhinav Baishander
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    सब कुछ तो था ख़राब सा; दिन, वक़्त और मैं
    ऊपर से, तुम भी साथ छुड़ाकर चले गये

    Abhinav Baishander
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