Abhinav Baishander

Abhinav Baishander

@iabhimanwriter

Abhinav Baishander shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abhinav Baishander's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

मुद्दतों बा'द यारों की याद आई है फूटकर हम भी रोने लगे ज़ोर से — Abhinav Baishander
हुआ बर्बाद जिस किरदार से मैं उसी को जिंदगानी लिख रहा हूँ — Abhinav Baishander
ख़ुदा से एक ही फ़रियाद तो है मैं सब-कुछ सीख लेना चाहता हूँ — Abhinav Baishander
ग़म, ख़ुशी, चाह, उदासी को समझने वाला मुझ सेे बेहतर हो कोई मुझ को समझने वाला — Abhinav Baishander
बहुत कम उम्र बाक़ी रह गई है ख़तम होने को है क़िस्सा हमारा — Abhinav Baishander
ख़्वाबों की तस्वीर बनाने वालों ने ख़्वाहिश को ही अपने 'पर' कर लेना है — Abhinav Baishander
नहीं अदना नहीं “अहल-ए-जिगर" के शे'र को पढ़ना जिगर होना ज़रूरी है “जिगर" की बात करने को — Abhinav Baishander
सब कुछ तो था ख़राब सा; दिन, वक़्त और मैं ऊपर से, तुम भी साथ छुड़ा कर चले गए — Abhinav Baishander
निभाने वाले हम को चाहिए थे सो हम ने दुश्मनों से दोस्ती की — Abhinav Baishander
शजर की शाख़ पर झूले पड़े हैं बहन ने बाँध दी राखी हमारे — Abhinav Baishander
जिस ने अपनी जंग लड़ी हो शिद्दत से उस ने अपना नाम अमर कर लेना है — Abhinav Baishander
मुझे याद रखना दु'आओं में यारों बहुत दूर इक दिन चला जाऊँगा मैं — Abhinav Baishander
मिरी आँखों से दुनिया देखना चाहो तो फिर इक बार मिरी पलकों तले कुछ घाव हैं, तुम चूम कर देखो — Abhinav Baishander
तुम्हारे साथ तो कट जाएगी तुम्हारे बा'द क्या होगा सनम — Abhinav Baishander
अव्वल, अव्वल सबने आने की ज़िद है क्या सबने मेहनत फ़र-फ़र कर लेना है? — Abhinav Baishander
सारी दुनिया के चारा-गर आए दर्द में कुछ कमी नहीं आई — Abhinav Baishander

Ghazal

मैं वहशत को फ़ुग़ानी लिख रहा हूँ मुहब्बत तुझ को फ़ानी लिख रहा हूँ, हुआ बर्बाद जिस किरदार से मैं उसी को ज़िंदगानी लिख रहा हूँ सभी किरदार मरते जा रहे हैं अनोखी इक कहानी लिख रहा हूँ जुनूँ वहशत ने मुझ पर क्या किया है ज्वाला को मैं पानी लिख रहा हूँ यक़ीं कर आसमाँ झुक जाएगा ये अपाहिज की ज़बानी लिख रहा हूँ मआ'नी ज़िंदगी के क्या लिखूँ मैं किराए पर मकानी लिख रहा हूँ न हो ख़रगोश जैसा हाल अपना सो कछुए की रवानी लिख रहा हूँ कहानी मेरी है किरदार मेरा मैं अपनी तर्जुमानी लिख रहा हूँ उसे एहसास ना हों ग़म हमारे मैं ग़म को शादमानी लिख रहा हूँ मुहब्बत में बिछड़ना मरहला है जुदाई जावेदानी लिख रहा हूँ तुझी से ज़िस्म उजड़ा जान उजड़ी तुझी को राजधानी लिख रहा हूँ मुझे तहज़ीब में लिखना पड़ेगा ग़ज़ल में ख़ानदानी लिख रहा हूँ — Abhinav Baishander
ज़ेहन में बात जो भी थी बता देते तो अच्छा था जो कुछ कहना सुनाना था सुना देते तो अच्छा था सभी शिकवे गिले तेरे ज़माने से हुए मालूम शिक़ायत मुझ सेे थी मुझ को बता देते तो अच्छा था मुहब्बत तुम ने दफ़ना कर हयात-ए-हिज्र अपनायी तो अब क्यूँँ सोचते हो तुम जता देते तो अच्छा था शब-ए-तन्हा में गुज़री उम्र पर आँसू बहाना क्या कलेजा चीरकर अपना दिखा देते तो अच्छा था किए वादे कई तुम ने सफ़र की इब्तिदा में पर वो इक वा'दा मुहब्बत का निभा देते तो अच्छा था मलामत कर रहे हो चीखते हो अब गुनाहों पर गुनाह को देखते ही ग़ुल मचा देते तो अच्छा था सभी मुजरिम नहीं थे क़ैद थे जो क़ैदखानों में जो मुज़रिम थे उन्हीं को तुम सज़ा देते तो अच्छा था बहुत पछता रहे हैं सोचते हैं नस्लें बच जातीं अगर सच से उन्हें वाकिफ़ करा देते तो अच्छा था — Abhinav Baishander