main vehshat ko fughaani likh raha hooñ | मैं वहशत को फ़ुग़ानी लिख रहा हूँ

  - Abhinav Baishander

मैं वहशत को फ़ुग़ानी लिख रहा हूँ
मुहब्बत तुझको फ़ानी लिख रहा हूँ,

हुआ बर्बाद जिस किरदार से मैं
उसी को ज़िंदगानी लिख रहा हूँ

सभी किरदार मरते जा रहे हैं
अनोखी इक कहानी लिख रहा हूँ

जुनूँ वहशत ने मुझ पर क्या किया है
ज्वाला को मैं पानी लिख रहा हूँ

यकीं कर आसमाँ झुक जायेगा ये
अपाहिज की ज़बानी लिख रहा हूँ

मआनी ज़िंदगी के क्या लिखूँ मैं
किराए पर मकानी लिख रहा हूँ

न हो ख़रगोश जैसा हाल अपना
सो कछुए की रवानी लिख रहा हूँ

कहानी मेरी है किरदार मेरा
मैं अपनी तर्जुमानी लिख रहा हूँ

उसे एहसास ना हों ग़म हमारे
मैं ग़म को शादमानी लिख रहा हूँ

मुहब्बत में बिछड़ना मरहला है
जुदाई जावेदानी लिख रहा हूँ

तुझी से ज़िस्म उजड़ा जान उजड़ी
तुझी को राजधानी लिख रहा हूँ

मुझे तहज़ीब में लिखना पड़ेगा
ग़ज़ल में ख़ानदानी लिख रहा हूँ

  - Abhinav Baishander

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