@azhar-farag
Azhar Farag shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Azhar Farag's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मेरे बस में नहीं इलाज उसका
ज़ख़्म देखा है मैंने आज उसका
जितना आगे का आदमी है वो
रद न कर दे उसे समाज उसका
बता रहा है झटकना तेरी कलाई का
ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का
मैं ज़िंदगी को खुले दिल से खर्च करता था
हिसाब देना पड़ा मुझको पाई-पाई का
जब सर-ए-शाम पजीराई-ए-फ़न होती है
शाहज़ादी को कनीज़ों से जलन होती है
ले तो आया हूँ तुझे घेर के अपनी जानिब
आगे इंसान की अपनी भी लगन होती है
वो जो इक शख़्स मुझे ताना-ए-जाँ देता है
मरने लगता हूँ तो मरने भी कहाँ देता है
तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझको क़ुबूल
ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
ये सुहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है