
वो जो इक शख़्स मुझे ताना-ए-जाँ देता है
मरने लगता हूँ तो मरने भी कहाँ देता है
तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है
— Azhar Faragh
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