Azhar Faragh

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    ये नहीं देखते कितनी है रियाज़त किस की
    लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को

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    कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है
    इक रिफ़ाक़त में कहाँ उम्र गुज़र सकती है

    तुझ से कुछ और त'अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा
    ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है

    मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँ
    वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है

    हो अगर मौज में हम जैसा कोई अंधा फ़क़ीर
    एक सिक्के से भी तक़दीर सँवर सकती है

    सुब्ह-दम सुर्ख़ उजाला है खुले पानी में
    चाँद की लाश कहीं से भी उभर सकती है

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    बता रहा है झटकना तेरी कलाई का
    ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का

    मैं ज़िंदगी को खुले दिल से खर्च करता था
    हिसाब देना पड़ा मुझको पाई-पाई का

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    जब तलक तेरा सहारा है मुझे
    गहरा पानी भी किनारा है मुझे

    आप मौजूद को रद्द करते हैं
    मेरा मतरूक भी प्यारा है मुझे

    न भी चमके तो कोई बात नहीं
    तू तो वैसे ही सितारा है मुझे

    मिल गई होगी ग़लत बस में नशिस्त
    जिसने मंज़िल पे उतारा है मुझे

    कौन मानेगा मेरे क़ातिल ने
    बर्फ़ की नोख से मारा है मुझे

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    जब सर-ए-शाम पजीराई-ए-फ़न होती है
    शाहज़ादी को कनीज़ों से जलन होती है

    ले तो आया हूँ तुझे घेर के अपनी जानिब
    आगे इंसान की अपनी भी लगन होती है

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    दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
    ताले की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था

    कभी कभी आती थी पहले वस्ल की लज़्ज़त अंदर तक
    बारिश तिरछी पड़ती थी तो कमरा गीला होता था

    शुक्र करो तुम इस बस्ती में भी स्कूल खुला वर्ना
    मर जाने के बा'द किसी का सपना पूरा होता था

    जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी
    दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था

    भले ज़माने थे जब शे'र सुहूलत से हो जाते थे
    नए सुख़न के नाम पे 'अज़हर' 'मीर' का चर्बा होता था

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    वो जो इक शख़्स मुझे ताना-ए-जाँ देता है
    मरने लगता हूँ तो मरने भी कहाँ देता है

    तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझको क़ुबूल
    ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है

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    मेरी ख्वाहिश है कि तुझे फूलों से फतह करू
    वरना ये काम तो तलवार भी कर सकती है

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    दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
    तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था

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    तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
    ये सुहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है

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