जब मुक़द्दर में फ़ना होना लिखा ही है
    हर्ज क्या है फिर बिखर कर ख़ाक होने में
    A R Sahil "Aleeg"
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    सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
    कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है
    A R Sahil "Aleeg"
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    मुझे कहना बहुत कुछ, पूछना भी है बहुत कुछ
    मगर अब कहने सुनने को बचा भी कुछ नहीं है
    A R Sahil "Aleeg"
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    मुझको दुनिया जहाँ की दौलत नहीं चाहिए हाफ़िद
    हम तो बस साथ तेरे ही ज़िंदगी की दुआ लेंगे
    A R Sahil "Aleeg"
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    बेवफ़ाई की तुमने जाँ, और सज़ा ख़ुद को देता हूँ
    चाय, सिगरेट और गाँजा से जलाता हूँ इस दिल को
    A R Sahil "Aleeg"
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    ख़र्च कर दें जिसे वो ही दौलत असल रिज़्क़ है
    वो नहीं है, जिसे आप रखते तिजोरी में हैं
    A R Sahil "Aleeg"
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    मरीज़-ए- इश्क़ से उसका हाल मत पूछा करो तुम
    तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ
    A R Sahil "Aleeg"
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    इश्क़ इकलौती वो मज़हब है जिसके उम्मती यहाँ
    बेवफ़ा की भी इबादत करते है ता-दम-ए-पसीं
    A R Sahil "Aleeg"
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    रूठने और मनाने का हुनर भूल गया
    मै मुहब्बत को बचाने का हुनर भूल गया
    A R Sahil "Aleeg"
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    न कर पाया ख़ुदा को जब मैं राज़ी फिर बता मुझको
    करूंँगा क्या? ले कर शोहरत ये दौलत या वो लड़की अब
    A R Sahil "Aleeg"
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