मेरे तबीब, मिरा भी कभी इलाज बता
जी कल का क्या है, नहीं कल नहीं तू आज बता
जी कल का क्या है, नहीं कल नहीं तू आज बता
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मेरी नज़र में उस ने जब उस नज़र से देखा
दिल में मेरे ये कैसे जज़्बात आ रहे हैं
दिल में मेरे ये कैसे जज़्बात आ रहे हैं
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मैं याद-ए-रफ़्तगाँ की याद में बहुत रोया
तभी तो वक़्त-ए-मुलाक़ात में बहुत रोया
तभी तो वक़्त-ए-मुलाक़ात में बहुत रोया
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"ख़ामोशी"
ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
किसी से कुछ भी नहीं कहती हो
क्या ग़म है जाने क्या क्या सहती हो
क्या बात है क्या छुपा के रखती हो
आओ कुछ तो अस्वात करें
ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
तुम भी हो तन्हा हम भी हैं तन्हा
कुछ तुम सुनाओ कुछ हम सुनाएँ
रात को दिन दिन को रात करें
चलो इक रोज़ मुलाक़ात करें
ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
Read Fullतुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
किसी से कुछ भी नहीं कहती हो
क्या ग़म है जाने क्या क्या सहती हो
क्या बात है क्या छुपा के रखती हो
आओ कुछ तो अस्वात करें
ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
तुम भी हो तन्हा हम भी हैं तन्हा
कुछ तुम सुनाओ कुछ हम सुनाएँ
रात को दिन दिन को रात करें
चलो इक रोज़ मुलाक़ात करें
ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें
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