Mohd Afsar

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@Afsar_ai_

Afsar Majnu shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Afsar Majnu's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दिसम्बर की सर्दी है बस तुम नहीं हो अकेली रज़ाई से रुकती नहीं ठंड — Mohd Afsar
अपने मकान-ए-दिल में झाँको तो कभी तुम कहते हो किस को वहाँ रहता है कौन — Mohd Afsar
उस के भी साथ हूँ क्या गिला है तुझे एक के साथ इक फ्री मिला है मुझे — Mohd Afsar
उसी के इंतिज़ार में कटे भी पूरी ज़िंदगी किसी ने इंतिज़ार करने को कहा है उम्र भर — Mohd Afsar
कभी देखा नहीं मैं इनका चेहरा किसी जानिब तो अच्छी लड़कियाँ हैं — Mohd Afsar
तभी मैं अपनी माँ के सामने नहीं रोता अगर मैं रोता हूँ तो मेरी माँ रो देती है — Mohd Afsar
ग़ज़ल से हाथ छूटे तो किधर जाएँ बताओ सब को अपने अपने घर जाएँ — Mohd Afsar
ये किस ने जेल में लाया खाना हाए अल्लाह मुजरिम का भी है कोई दीवाना हाए अल्लाह — Mohd Afsar
सादगी नज़र आई उस के लहजे में आज उस ने ऊर्दू में बात की — Mohd Afsar
कैसी सूरत बना के बैठा है मेरा महबूब उस की सूरत पे फ़िदा हूँ मैं मिरा क्या होगा — Mohd Afsar
इस बरस मैं जन्मदिन कैसे मनाऊँ इस बरस तो तुम नहीं हो साथ मेरे — Mohd Afsar
मेरे तबीब, मिरा भी कभी इलाज बता जी कल का क्या है, नहीं कल नहीं तू आज बता — Mohd Afsar
मेरी नज़र में उस ने जब उस नज़र से देखा दिल में मेरे ये कैसे जज़्बात आ रहे हैं — Mohd Afsar
मैं याद-ए-रफ़्तगाँ की याद में बहुत रोया तभी तो वक़्त-ए-मुलाक़ात में बहुत रोया — Mohd Afsar
कितने हैं चाहने वाले अब ये देखना है मेरे यहाँ से जाने के बा'द कौन रोया — Mohd Afsar
प्रेम का दिन है मगर मैं ग़म में हूँ मुझ को पुलवामा ज़बानी याद है — Mohd Afsar

Ghazal

मोहब्बत में जो इतनी ख़ामियाँ हैं, जो कुछ है तेरे मेरे दरमियाँ हैं मुझे ऐसी भी क्या मजबूरियाँ हैं, कि मेरे दिल में दो दो लड़कियाँ हैं कभी मिलता नहीं मुझ सेे नया शख़्स, मिरे हिस्से में बासी रोटियाँ हैं नहीं दिखता किसी को प्यार मेरा, सभी के चश्म पे क्या पट्टियाँ हैं जहाँ तुम ने सँवारे बाल अपने, वहीं पर लड़खड़ाती कश्तियाँ हैं सितम क्या है कि चश्म-ए-तर है क्यूँँ ये, शजर है सूखा, सूखी पत्तियाँ हैं कभी जो सादगी थी इतनी, अब तो उसी दिल में सुलगती भट्ठियाँ हैं कभी देखा नहीं मैं इनका चहरा, किसी जानिब तो अच्छी लड़कियाँ हैं सुना है शादी भी कर ली है तुम ने, बताओ अब, कि कितनी बेटियाँ हैं कभी हुस्न-ए-नज़र से देख उन को, कि तुझ सेे अच्छी तेरी बेटियाँ हैं — Mohd Afsar

Nazm