हम को अब भी ये कहानी याद है
नौ जवानों की जवानी याद है
मैं ने जो पूछा किसी से याद है
वो कहा कु़र्बानी या'नी याद है
आह की आवाज़ सुन कर फ़ौज की
रुक गया था बहता पानी याद है
प्रेम का दिन है मगर मैं ग़म में हूँ
मुझ को पुलवामा ज़बानी याद है
— Mohd Afsar
नौ जवानों की जवानी याद है
मैं ने जो पूछा किसी से याद है
वो कहा कु़र्बानी या'नी याद है
आह की आवाज़ सुन कर फ़ौज की
रुक गया था बहता पानी याद है
प्रेम का दिन है मगर मैं ग़म में हूँ
मुझ को पुलवामा ज़बानी याद है
Other ghazal from the same pen
Shers of shaheed.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling