इस जहाँ में सब सेे है बड़ा फ़साद नौकरी
पहले शा'इरी है फिर वो उस के बा'द नौकरी
कुछ नसीब अच्छी भी हो थोड़ी सी ख़राब भी
साथ-साथ में हो तेरे शाद-शाद नौकरी
मैं तो चाहता हूँ कुछ अलग हो मेरे साथ में
कितने आलिमों का मंज़िल-ए-मुराद नौकरी
जो किसी का भी न हो रहा था अब वो मेरा है
मैं तो बस यही कहूँगा धन्यवाद नौकरी
— Mohd Afsar















