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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं - Tehzeeb Hafi

क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं

इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

Tehzeeb Hafi
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Ishq Shayari

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