"ख़ामोशी"

ख़ामोशी आ बात करें
तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें

किसी से कुछ भी नहीं कहती हो
क्या ग़म है जाने क्या क्या सहती हो
क्या बात है क्या छुपा के रखती हो
आओ कुछ तो अस्वात करें
ख़ामोशी आ बात करें

तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें

तुम भी हो तन्हा हम भी हैं तन्हा
कुछ तुम सुनाओ कुछ हम सुनाएँ
रात को दिन दिन को रात करें
चलो इक रोज़ मुलाक़ात करें
ख़ामोशी आ बात करें

तुम क्यूँ इतना ख़ामोश रहती हो
ख़ामोशी आ बात करें

— Mohd Afsar

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