10
2 Likes
उठा हैं दिल में सौ दफ़ा ख़याल उस मलाल का
मैं रोज़ रात सोचता वो इश्क़ था कमाल का
मैं रोज़ रात सोचता वो इश्क़ था कमाल का
हथेलियाँ निहारते वो वक़्त भी गुज़ार दी
मिला था इत्तिफ़ाक़ से जो पल मुझे विसाल का
उसे न कुछ कहे कोई जो इश्क़ ले मेरी ये जान
क़सूर हो तो सिर्फ़ मेरे ख़ून के उबाल का
सितम जो भी मिला मुझे लिखा था वो नसीब में
किसी से क्यूँ गिला करें हम इस दिल-ए-निढाल का
उसे भी कुछ दिखा नहीं मैं ने भी सिर्फ़ लिख दिया
जो हाल मेरे दिल का था जो हाल था रुमाल का
बिठा के तुम को इक जगह निहारना है बस मुझे
हैं देखना कि क्या कोई हैं अंत इस जमाल का
ये पूछना था अर्ज़ को जो ज़ेहन में सवाल हैं
उठा ले फ़ोन और फिर जवाब दे सवाल का
9
2 Likes
8
1 Like
थपेड़े वक़्त के बे-शक वो हँस-कर सह भी सकता था
मगर कुछ पल में ही दीवार तन्हा ढह भी सकता था
मगर कुछ पल में ही दीवार तन्हा ढह भी सकता था
यक़ीनन कश्मकश होगी अजी कुछ सिलसिले होंगे
ये मेरी आँख का आँसू तो बाहर बह भी सकता था
तुम्हें ही चाहता हूँ मैं तुम्हें ही चाहता है दिल
रहा ख़ामोश मैं जब कि तुम्हें ये कह भी सकता था
ये उस का फ़ैसला था रास्ते को छोड़ देते हैं
उसी रस्ते पे लेकिन मैं सहर तक रह भी सकता था
7
2 Likes
जीते जी लेता रहा मैं नाम उस का
मरते दम आया नहीं पैग़ाम उस का
मरते दम आया नहीं पैग़ाम उस का
उम्र-भर ख़ुद को बताता रह गया मैं
पास जा, फिर हाथ फट से थाम उस का
उफ़ ये बेचैनी ये मेरी छटपटाहट
कर न पाए आज तक इक काम उस का
और मेरी ज़िंदगी में क्या मिलेगा
दर्द आँसू जो भी है इन'आम उस का
आज सब-कुछ हार कर के सोचता हूँ
चल पड़ूँ मैं जिस तरफ़ हैं धाम उस का
6
2 Likes
एक दरिया ने छोड़ा था तन्हा जिसे
अब वो कतरा कहीं इक समुंदर में था
मैं नहीं कह रहा उस का पत्थर हैं दिल
पर ये मुमकिन हैं दिल उस का पत्थर में था
जिस के ख़ातिर ही सूरज जला उम्र-भर
चाँद वो रात के बस मुकद्दर में था
साथ उस के कहीं मैं पहाडों में हूँ
नींद टूटी तो देखा कि बिस्तर में था
मैं तो मरता हुआ भी दुआ दे गया
ख़ून देखा जो उस के ही ख़ंजर में था
5
2 Likes
गुज़िश्ता साल अपनी बेबसी पर हँसते थे हैरान थे
हुआ इक रोज़ फिर ऐसा मुझे अपनी हँसी अच्छी लगी
भरोसा बारहा तुम पर किया अपना सभी कुछ वार कर
सितम ऐसे मिले तुम से कि दिल को खुद-कुशी अच्छी लगी
हमारे महफ़िलों के आदतन तुम आन थे तुम शान थे
तुम्हारे महफ़िलों में सिर्फ़ मेरी ही कमी अच्छी लगी
लहू के घुट पी करते गए हम यूँ तो हाल-ए-दिल बयाँ
ख़ुशी की बात हैं तुम को हमारी शा'इरी अच्छी लगी
4
2 Likes
3
1 Like
सच कहता हूँ रातें अच्छी गुज़रेंगी
तुम भी उस को सोच के सोना बंद करो
टूटे घर में कोई न आना चाहेगा
इस दिल का अब कोना-कोना बंद करो
बीत चुकी जो उस को सोचे जाते हो
आज के इस लम्हे को खोना बंद करो
हाल-ए-दिल लोगों को अपना बतलाके
सबके दिल में काँटे बोना बंद करो
'अर्ज़' तुम्हें जिन लोगों ने ठुकराया है
तुम भी उन लोगों का होना बंद करो
2
3 Likes
सामने मेरे ही उस का हाथ था
में था रक़ीब
मैं उसी दिन मान बैठा इश्क़ में ये मात हैं
अजनबी इक शख़्स के लग कर गले हम रो पड़े
पूछता वो रह गया "कुछ तो बता, क्या बात हैं"?
पहले लगता था हसीं मौसम हुआ है इश्क़ में
अब ये लगता है कि जैसे हर घड़ी बरसात हैं
बैंड-बाजा और ऊपर से पटाखों का ये शोर
चीर डाले दिल को जो तलवार सी बारात हैं
कोई आए, कोई जाए, फ़र्क अब पड़ता नहीं
दिल लगाने के नहीं अब 'अर्ज़' के हालात हैं
1
6 Likes










