पता था रात बड़ी देर तक सताएगी
न जानता था मेरी जान ही ले जाएगी
जहाँ मैं हूँ मुझे ख़ुद की ख़बर नहीं मिलती
तेरी ख़मोशी मेरा हाल अब बताएगी
मैं ने ये सोच के उस को यहाँ से जाने दिया
अगर कभी उसे आना है तो वो आएगी
कि जंगलों से भी कोई तो रास्ता निकले
जो तीरगी में भी कुछ रौशनी मिलाएगी
कभी वो वक़्त भी इक-दिन ज़रूर आएगा
तुझे भी याद मेरी रात-दिन रुलाएगी
— Ankit Dixit















