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मोहब्बत जंग है ये जंग जारी है
न जाने क्यूँ तबीयत आज भारी है
न जाने क्यूँ तबीयत आज भारी है
किसी ने जैसे केशों को सँवारा हो
तभी तो आज मौसम में ख़ुमारी है
इन्हें पागल नहीं बतला ओ चारा-गर
यहाँ सब को मोहब्बत की बीमारी है
किसी दिन 'सूर्य' तुम भी हार जाओगे
यही इक जंग कृष्णा ने भी हारी है
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इश्क़ में हो तुम तो जंग को जारी रक्खो
सब्र के साथ ये भी जीती जा सकती है
सब्र के साथ ये भी जीती जा सकती है
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तुम से बिछड़े तो घूम शहर आए हम
शायद कोई होता जो तुम सा होता
शायद कोई होता जो तुम सा होता
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