Rituraj kumar

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    अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद की
    क्या ग़ज़ब होगा वो जिसने ख़ुदकुशी ईजाद की

    शायरी का ये हुनर कुछ देर से आया मगर
    जी-हुज़ूरी की नहीं मैंने किसी उस्ताद की
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    पहला इश्क़ सफल हो जाए यार कहाँ ये मुमकिन है
    पहली रोटी गोल बने ये तो लगभग नामुमकिन है
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    जिसने दिल तोड़ा है मेरा बद-दुआ' दूँगा उसे
    आप क्यूँ डरने लगे जी, आपको क्या हो गया?

    अब ज़रा-सा भी पिया तो होश आएगा नहीं
    तुमको पीना है तो पी लो दोस्त, मेरा हो गया
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    मुझे मिलने महीनों बाद आई हो, बधाई हो!
    मचाया शोर यारों ने "बधाई हो, बधाई हो!"

    इधर मैं भी बिखेरे जा रहा हूँ हर तरफ़ जलवा
    उधर तुम भी हर इक महफ़िल में छाई हो, बधाई हो!

    अगर बाली के जैसा वो निकल जाए तो लानत है
    मगर लक्ष्मण के जैसा जिसका भाई हो, बधाई हो!

    वो जिसके पास दौलत और शोहरत हो बधाई क्या
    वो जिसके हाथ में तेरी कलाई हो, बधाई हो!
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    फूल छत पे खिल गए पर ताज़गी खोते गए
    हम बहुत करके तरक़्क़ी सादगी खोते गए

    था पिता पर बोझ तो हम दिल्लगी में चूर थे
    बोझ जब खुद पर पड़ा तो दिल्लगी खोते गए
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    करेगा भी तो कोई क्या करेगा?
    ये मेरा ग़म है मेरा ही रहेगा

    मुझे कब से सुनाए जा रहे हो
    पलटकर बोल दूँ अच्छा लगेगा?
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    दुश्मनी से या किसी को दोस्ती से ख़ौफ़ है
    आदमी को अब तो केवल आदमी से ख़ौफ़ है

    आप ये कहते हैं मुझसे 'डर नहीं मैं साथ हूँ'
    सच तो ये है यार मुझको आप ही से ख़ौफ़ है

    मेरी बर्बादी का किस्सा सुन लिया था इक दफ़ा
    बस तभी से आशिक़ों को आशिक़ी से ख़ौफ़ है

    चमचमाती आपकी दुनिया मुबारक़ आपको
    हम तो अंधे हैं सो हमको रौशनी से ख़ौफ़ है

    लाख सब कहते रहें 'इस ज़िंदगी से इश्क़ है'
    पर हक़ीक़त ये है 'सबको ज़िंदगी से ख़ौफ़ है'

    इस तरह डरने लगे हैं हम तुम्हारे इश्क़ से
    जिस तरह से मुजरिमों को हथकड़ी से ख़ौफ़ है
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    मियां इतना भी मीठा बोलना अच्छा नहीं होता
    बुरे लोगों को अच्छा बोलना अच्छा नहीं होता

    पुराना मशवरा है यार हाकिम को ये समझाओ
    ज़रूरत से ज़ियादा बोलना अच्छा नहीं होता

    मोहब्बत में निगाहों से चलो कुछ गुफ़्तगू कर लें
    जुबां से ही हमेशा बोलना अच्छा नहीं होता

    मुझे डर है हुकूमत एक दिन यह भी न कह डाले
    बनाओ ख़ुद को गूंगा बोलना अच्छा नहीं होता

    हमारा नाम भी लेना जब उसका नाम लेना तो
    बिना मोहन के राधा बोलना अच्छा नहीं होता

    भरोसा हो भले कितना मगर है तो भरोसा ही
    किसी से राज़ दिल का बोलना अच्छा नहीं होता

    भरो हूँकार है हिम्मत तो आकर सामने मेरे
    कि यूँ पीछे से धावा बोलना अच्छा नहीं होता

    चमक उसपर भले कितना भी आ जाए मगर प्यारे
    किसी पीतल को सोना बोलना अच्छा नहीं होता।
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    सुनो यारों, मैं जब उससे कहूँ 'तुमसे मोहब्बत है'
    तुम्हें पीछे से कहना है 'हक़ीक़त है, हक़ीक़त है'

    वो जब चौंकी 'मियां ऋतुराज इतनी रात मेरे घर'
    कहा मैंने 'अजी वो नींद में चलने की आदत है'
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    हम सरीखे शायरों का इश्क़ ठुकराए कोई
    हुस्न पाया है तो अब यूँ भी न इतराए कोई

    क्लास से बाहर निकलता था घड़ी मैं देखकर
    ठीक ऐसे वक़्त पर जब आके टकराए कोई
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