
हम सरीखे शाइरों का इश्क़ ठुकराए कोई
हुस्न पाया है तो अब यूँ भी न इतराए कोई
क्लास से बाहर निकलता था घड़ी मैं देख कर
ठीक ऐसे वक़्त पर जब आके टकराए कोई
— Rituraj kumar
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