Rituraj kumar

Rituraj kumar

@Riturajkumar

Rituraj kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rituraj kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

पहला इश्क़ सफल हो जाए यार कहाँ ये मुमकिन है पहली रोटी गोल बने ये तो लगभग नामुमकिन है — Rituraj kumar
मैं अब तक सारे अपने काम कल पर टाल देता था पर उस को देख कर सोचा मोहब्बत आज करनी है — Rituraj kumar
अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद की क्या ग़ज़ब होगा वो जिस ने ख़ुद-कुशी ईजाद की — Rituraj kumar

Ghazal

किसी की क़िस्मत से वो ख़फ़ा है किसी की दौलत से वो ख़फ़ा है किसी की ख़ुशियों से उस को शिकवा किसी की बरकत से वो ख़फ़ा है उसे पता है वो कुछ भी कर ले नहीं मिलेगी अब उस को जन्नत सो ऐसे बनता है जैसे सब को लगे कि जन्नत से वो ख़फ़ा है हमारी आदत है प्यार करना और उस की आदत है वार करना सो उस की आदत से हम ख़फ़ा हैं हमारी आदत से वो ख़फ़ा है भले बुरे हैं मगर ये जैसे हैं इनको अपना मैं मानता हूँ ये दोस्त मेरे हैं जान मेरी इन्हीं की सोहबत से वो ख़फ़ा है उसी ने चाहा था नाम हो तब मेरा भी ग़ालिब, फ़राज़ जैसा मैं अब कि सबकी ज़बाँ पे हूँ तो सुना है शोहरत से वो ख़फ़ा है — Rituraj kumar
कहीं पर लू तपाता है कहीं पर बारिशें भी हैं मगर कुछ कर गुज़रने की हमारी ख़्वाहिशें भी हैं अनोखे इश्क़ की तुम ये अनोखी शर्त तो देखो उसी से प्यार करना है कि जिस सेे रंजिशें भी हैं फ़क़त दुश्मन के डर से रोने वाले तुम ज़रा सोचो हमारी राह में तो दोस्तों की साज़िशें भी हैं ज़रूरी तो नहीं सब कुछ तुम्हारे मन मुताबिक हो मियाँ ये ज़िंदगी है ज़िंदगी की बंदिशें भी हैं उसी को याद करने से हमें फ़ुर्सत नहीं मिलती उसी को भूल जाने की हमारी ख़्वाहिशें भी हैं कि दर पर मौत आके रोज़ दस्तक दे के जाती है मगर ज़िंदा बचे रहने की हर पल कोशिशें भी हैं ज़रा सी बात पर घर छोड़ के जाना है गर तुम को तो इतना जान लो बाहर हज़ारों गर्दिशें भी हैं — Rituraj kumar
मियाँ इतना भी मीठा बोलना अच्छा नहीं होता बुरे लोगों को अच्छा बोलना अच्छा नहीं होता पुराना मशवरा है यार हाकिम को ये समझाओ ज़रूरत से ज़ियादा बोलना अच्छा नहीं होता मोहब्बत में निगाहों से चलो कुछ गुफ़्तगू कर लें ज़बाँ से ही हमेशा बोलना अच्छा नहीं होता मुझे डर है हुकूमत एक दिन ये भी न कह डाले बनाओ ख़ुद को गूंगा बोलना अच्छा नहीं होता हमारा नाम भी लेना जब उस का नाम लेना तो बिना मोहन के राधा बोलना अच्छा नहीं होता भरोसा हो भले कितना मगर है तो भरोसा ही किसी से राज़ दिल का बोलना अच्छा नहीं होता भरो हूँकार है हिम्मत तो आ कर सामने मेरे कि यूँँ पीछे से धावा बोलना अच्छा नहीं होता चमक उसपर भले कितना भी आ जाए मगर प्यारे किसी पीतल को सोना बोलना अच्छा नहीं होता। — Rituraj kumar
वो जैसा कहते हैं उन के जैसा बनना पड़ता है बच्चों को बहलाने ख़ातिर बच्चा बनना पड़ता है जो जब चाहे दिल के भीतर आता है फिर जाता है प्यार में अब बिन दरवाज़े का कमरा बनना पड़ता है इस दुनिया में रहते - रहते मुझ को ये मालूम हुआ जैसे भी हो मुँह पर सबके अच्छा बनना पड़ता है पहले प्यार जो करते थे वो लैला-मजनूँ बनते थे अब तो प्यार में बाबू,सोना क्या-क्या बनना पड़ता है एक समुंदर की देखें तो किस को क्या दे सकता है प्यासों की ख़ातिर तो मीठा दरिया बनना पड़ता है हो महबूब बड़ा जितना ग़म भी उतना ही देता है कान्हा से गर प्यार किया तो राधा बनना पड़ता है उड़ने की चाहत है लेकिन हालत से मजबूर भी हैं जीवन इक पिंजरा है सब को चिड़िया बनना पड़ता है एक हाथ में फ़ोटो उस की, एक में टूटा दिल अपना ग़ज़लें गर कहनी हैं तो फिर मुझ-सा बनना पड़ता है — Rituraj kumar