आना बहुत वो चाहते थे पर न आ सके
दहलीज़ तक तो आ गए थे घर न आ सके
कल फिर से उस की याद ने सोने नहीं दिया
जी इस लिए हम वक़्त पर दफ़्तर न आ सके
ये इश्क़ की कॉपी न जाने किस ने चेक की
लिक्खा तो मैं ने ख़ूब था नंबर न आ सके
इक मैं तुम्हारे प्यार में दिल्ली से आ गया
इक तुम कि अपने घर से भी बाहर न आ सके
— Rituraj kumar















