आना बहुत वो चाहते थे पर न आ सके
दहलीज़ तक तो आ गए थे घर न आ सके
कल फिर से उसकी याद ने सोने नहीं दिया
जी इसलिए हम वक़्त पर दफ़्तर न आ सके
ये इश्क़ की कॉपी न जाने किसने चेक की
लिक्खा तो मैंने ख़ूब था नंबर न आ सके
इक मैं तुम्हारे प्यार में दिल्ली से आ गया
इक तुम कि अपने घर से भी बाहर न आ सके
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