kisi ki qismat se vo KHafaa hai kisi ki daulat se vo KHafaa hai | किसी की क़िस्मत से वो ख़फ़ा है किसी की दौलत से वो ख़फ़ा है

  - Rituraj kumar

किसी की क़िस्मत से वो ख़फ़ा है किसी की दौलत से वो ख़फ़ा है
किसी की ख़ुशियों से उसको शिकवा किसी की बरकत से वो ख़फ़ा है

उसे पता है वो कुछ भी कर ले नहीं मिलेगी अब उसको जन्नत
सो ऐसे बनता है जैसे सबको लगे कि जन्नत से वो ख़फ़ा है

हमारी आदत है प्यार करना और उसकी आदत है वार करना
सो उसकी आदत से हम ख़फ़ा हैं हमारी आदत से वो ख़फ़ा है

भले बुरे हैं मगर ये जैसे हैं इनको अपना मैं मानता हूँ
ये दोस्त मेरे हैं जान मेरी इन्हीं की सोहबत से वो ख़फ़ा है

उसी ने चाहा था नाम हो तब मेरा भी ग़ालिब, फ़राज़ जैसा
मैं अब कि सबकी जुबाँ पे हूँ तो सुना है शोहरत से वो ख़फ़ा है

  - Rituraj kumar

Jannat Shayari

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