किसी की क़िस्मत से वो ख़फ़ा है किसी की दौलत से वो ख़फ़ा है
किसी की ख़ुशियों से उसको शिकवा किसी की बरकत से वो ख़फ़ा है
उसे पता है वो कुछ भी कर ले नहीं मिलेगी अब उसको जन्नत
सो ऐसे बनता है जैसे सबको लगे कि जन्नत से वो ख़फ़ा है
हमारी आदत है प्यार करना और उसकी आदत है वार करना
सो उसकी आदत से हम ख़फ़ा हैं हमारी आदत से वो ख़फ़ा है
भले बुरे हैं मगर ये जैसे हैं इनको अपना मैं मानता हूँ
ये दोस्त मेरे हैं जान मेरी इन्हीं की सोहबत से वो ख़फ़ा है
उसी ने चाहा था नाम हो तब मेरा भी ग़ालिब, फ़राज़ जैसा
मैं अब कि सबकी जुबाँ पे हूँ तो सुना है शोहरत से वो ख़फ़ा है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Rituraj kumar
our suggestion based on Rituraj kumar
As you were reading Jannat Shayari Shayari